http://rajeshtripathi4u.blogspot.in/ Kalam Ka Sipahi / a blog by Rajesh Tripathi कलम का सिपाही/ राजेश त्रिपाठी का ब्लाग: लिखूं गजल इक तेरे नाम

Wednesday, October 14, 2009

लिखूं गजल इक तेरे नाम


-राजेश त्रिपाठी

लिखूं गजल इक तेरे नाम
-राजेश त्रिपाठी

तेरी हंसी को सुबह लिखूं,
और उदासी लिखूं शाम ।
आज बहुत मन करता है,
लिखूं गजल इक तेरे नाम।।
जुल्फें ज्यों सावन की घटा,
चेहरे में पूनम सी छटा ।
नीलकंवल से तेरे नयन,
मिसरी जैसे मीठे बचन।।
गालिब की तुम्हें लिखूं गजल,
और लिखूं इक छवि अभिराम।। (लिखूं गजल---)
सुंदरता को कर दे लज्जित,
ऐसी तू शफ्फाक बदन।
तेरे कदमों की आहट से,
खिल उठे मुरझाया चमन।।
तुझे जिंदगी लिखूं मैं,
और एक खुशनुमा पयाम।। (लिखूं गजल---)
मतलब भरे जमाने में,
इक गम के अफसाने में।
तुम ही हो इक आस किरण,
बस तुम ही हो जीवन धन।।
तुमको ही दिन-रात लिखूं,
लिखूं तुम्हें ही सुबहो-शाम (लिखूं गजल---)
आती जाती सांस लिखूं,
इक मीठा अहसास लिखूं।
जीवन का पर्याय लिखूं,
और भला क्या हाय लिखूं।।
तुम्हें लिखूं दिल की धड़कन,
खुशियों की हमनाम लिखूं। (लिखूं गजल..)

2 comments:

  1. सुंदर गजल लिखी है। अब ये उनके नाम है या नहीं, ये तो वे ही बता सकते हैं।
    दीपपर्व की अशेष शुभकामनाएँ।
    -------------------------
    आइए हम पर्यावरण और ब्लॉगिंग को भी सुरक्षित बनाएं।

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  2. आती जाती सांस लिखूं,
    इक मीठा अहसास लिखूं।
    जीवन का पर्याय लिखूं,
    और भला क्या हाय लिखूं।।
    तुम्हें लिखूं दिल की धड़कन,
    खुशियों की हमनाम लिखूं। (लिखूं गजल..)
    राजेश जी लाजवाब प्रेमाभिव्यक्ति है बधाई दीपावली की शुभकामनायें

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