http://rajeshtripathi4u.blogspot.in/ Kalam Ka Sipahi / a blog by Rajesh Tripathi कलम का सिपाही/ राजेश त्रिपाठी का ब्लाग: जुल्म का यह दौर क्यों भला जाता नहीं

Friday, August 23, 2013

जुल्म का यह दौर क्यों भला जाता नहीं



क्या कहें, कैसे कहें अब सहा जाता नहीं।
जुल्म का यह दौर क्यों भला जाता नहीं।।
अंधेरों की है हुकूमत मानो उजाले खो गये।
फरियाद किससे करें, हुक्मरां तो सो गये।।

हमने सोचा था नहीं ऐसा भी दिन आयेगा।
आदमी जब खुद आदमी से भी डर जायेगा।।
कोई मस्त है तो कोई जिंदगी से त्रस्त है।
न्याय का सूरज जैसे हो गया अस्त है।।


लूट,रेप,हत्या का जहां चल रहा राज है।
क्या ये गांधी का वह पावन स्वराज है।।
निर्भया हैं रो रही, हम तो शर्मसार हैं।
हर तरफ अब मचा सिर्फ हाहाकार है।।


राज दबंगों का सच्चा इंसां हैरान है।
ये प्रभु क्या यही मेरा हिंदुस्तान है।।
जिनको सिर्फ कुर्सियों से प्यार है।
उनसे उम्मीद रखना तो बेकार है।।

जिनको मुल्क से सच्चा प्यार है।
जाग जायें ये वक्त की पुकार है।।
भारतवर्ष में न्याय का उत्कर्ष हो।
होठों में मुसकान दिल में हर्ष हो।।

3 comments:

  1. सुंदर रचना...
    आप की ये रचना शनीवार यानी 24/08/2013 के ब्लौग प्रसारण में मेरा पहला प्रसारण पर लिंक की गयी है...
    इस संदर्व में आप के सुझावों का स्वागत है।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार- 25/08/2013 को
    वो शहीद कहलाते हैं ,,हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः5 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

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  3. सुन्दर सेतु चयन बढ़िया हिंदी ब्लॉग समूह जमावड़ा । शुक्रिया हमारे ब्लॉग को संयोजित करने का।

    सुन्दर आवाहन करता गीत।

    जिनको मुल्क से सच्चा प्यार है।
    जाग जायें ये वक्त की पुकार है।।
    भारतवर्ष में न्याय का उत्कर्ष हो।
    होठों में मुसकान दिल में हर्ष हो।।

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