http://rajeshtripathi4u.blogspot.in/ Kalam Ka Sipahi / a blog by Rajesh Tripathi कलम का सिपाही/ राजेश त्रिपाठी का ब्लाग: उरी के हमले से देश दहल गया है

Monday, September 19, 2016

उरी के हमले से देश दहल गया है


बस, अब और नहीं कुर्बानी

राजेश त्रिपाठी
·       हम अपने वीर जवानों को इस तरह कुरबान नहीं कर सकते
·       सशक्त राष्ट्र इस तरह लुंज-पुंज, असहाय नहीं हुआ करते
·       दंभ और हुंकार बहुत देखी, अब कुछ कर दिखाने की बारी
·       देश आक्रोश में है, देश के रहनुमा भी अब कठघरे में हैं
·       उनकी कथनी-करनी का फर्क मुल्क का बेड़ा न गर्क कर दे
·       पाकिस्तान का जन्म ही भारत विरोधी भावों से हुआ था
·       उससे दोस्ती का सपना देखना दिवा स्वप्न जैसा है
·       तत्काल उससे सारे कूटनीतिक रिश्ते तोड़े जायें
·       उसका मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा तत्काल खत्म हो
·       भविष्य में उससे किसी भी मुद्दे पर वार्ता नहीं की जाये
·       हर वार्ता में वह वेवजह कश्मीर को खींच लाता है
·       वह कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को घेर रहा है
·       एक बिल्ली जैसा देश शेर जैसे देश को हेकड़ी दिखा रहा है
·       सीधी लड़ाइयों में हारा पाकिस्तान अब छाया युद्ध लड़ रहा है
·       कश्मीर में अढ़ाई महीने से व्याप्त अशांति में भी उसका हाथ
·       मोदी ने बलूचिस्तान मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय कर उसे चिढ़ा दिया
·       वह हमारे सैनिकों पर हमला कर उनका नैतिक बल तोड़ रहा है
·       सारा देश शर्मासार है, शोक संतप्त है,वह इसका जवाब चाहता है


उरी में शहीद हुए वीर जवानों की ये शव पेटियां पूरे राष्ट्र पर, देश की सत्ता में बैठे लोगों के चेहरे पर एक कलंक और उनकी उस शपथ पर एक सवाल हैं जो वे पद संभालने के समय लेते हैं। ये महज शव पेटियां नहीं, ये हमारे वीर सपूतों के सपनों की, उनके हौसलों, ऊंचे मनोबल की पुण्य निशानियां हैं। इन वीर जवानों को शत-शत नमन। पूरा राष्ट्र हमेशा इनका ऋणी रहेगा। इनको सिर्फ नंबर में मत आंको, देखो कि इनके पीछे कितनी आंखें नम हो गयीं, कितने बच्चे अनाथ हो गये, कितने घरों के सपने टूट गये जो इन पर निर्भर थे, कितने परिवार हमेशा के लिए दुख में डूब गये। इनमें से कोई अपने बेटे को दिलासा देकर गया था कि वह जल्द उससे मिलने आयेगा, कोई अपनी बेटी से कह गया था कि वह अच्छी तरह से पढ़ाई करे। अब इन बच्चों को अपने पिता कभी नहीं मिलेंगे, अब उनकी यादें, उनकी शौर्य-गाथा ही इनका सहारा है। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने भारत पर इस तरह का कायराना और शर्मनाक हमला किया है। पाकिस्तान के जन्म के बाद से ही भारत पर उसके हमले शुरू हो गये थे। तब कबाइलियों ने इसकी शुरूआत की थी अब आतंकिस्तान बन चुके पाकिस्तान की शरण में फल-फूल और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आतंकवादी इसे अंजाम दे रहे हैं। सारा विश्व यह बात जान-मान चुका है कि पाकिस्तान आंतक की सबसे बड़ी फैक्ट्री है। वहां छोटे-छोटे बच्चों तक को जन्नत की मौज-मस्ती का ख्वाब दिखा कर आत्मघाती हमलावर बना दिया जाता है। जन्नत किसने देखी है उनकी जिंदगी तो शुरू होने से पहले ही खत्म कर दी जाती है। उनका कुछ ऐसे ब्रेनवाश किया जाता है कि वह किसी खास नशे में डूब कर खुद को, अपने परिवार को भूल जाते हैं और मरने को बेताब हो जाते हैं। अब तक भारत पर जितने हमले हुए वे पाकिस्तान में पल रहे आतंकवादियों के सरगनाओं के इशारे पर हुए, इसके पुख्ता सबूत भी मिले जो भारत ने उसे सौंपे लेकिन पाकिस्तान है कि मानता ही नहीं। न वह यह मानता है कि भारत में आतंकवादी हमलों में उसका हाथ है और न ही यह मानता है कि उसके यहां आतंकवादी पलते हैं। पूरा विश्व जानता है कि खुद पाकिस्तान भी आतंकवाद से तबाह है। उसके कब्जेवाले कश्मीर में बाकायदा आतंकवादियों के लिए ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं लेकिन वह इसे सिरे से नकार रहा है। उसी क्रम में उसने कश्मीर के उरी में 18 सितंबर को हुए हमले में भी पाकिस्तानियों का हाथ होने से साफ इनकार कर दिया हालांकि आतंकवादियों के पास से मिले सामान पाकिस्तान में बने पाये गये हैं। पाक प्रायोजित आतंकवादी हमलों में हमारे जितने जवान अब तक शहीद हुए हैं, उतने शायद ही किसी दूसरे देश में हुए हों। पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम और घुसपैठ की घटनाएं तो आम हैं। इसी साल अब कर पठानकोट से लेकर उरी तक तकरीबन 100 घुसपैठ की घटनाएं हो चुकी हैं। कश्मीर में आतंकवादी हमलों में अब तक चार हजार जवान शहीद हो चुके हैं।
अब तक कश्मीर में हुई आतंकवादी घटनाओं में शहीद हुए जवानों की संख्या पर नजर डालें तो सिर शर्म से झुक जाता है। यहां प्रस्तुत है कुछ आतंकवादी हमलों की सूची-
पठानकोट
- 2 से 5 जनवरी 2016 : जैश-ए-मोहम्मद के 6 आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया।
- हमला 4 दिन चला। इसमें 7 जवान शहीद हुए।
अनंतनाग
4 जून 2016 : अनंतनाग में चेकपोस्ट पर हमला। 1 एएसआई, 1 कांस्टेबल शहीद।
- 1 दिन पहले ही बीएसएफ काफिले को निशाना बना 3 जवानों की जान ली थी।
पंपोर
26
जून 2016 : पंपोर के पास श्रीनगर जम्मू हाईवे पर सीआरपीएफ काफिले पर हमला। 8 जवान शहीद, 20 जख्मी हुए। लश्कर ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।
ख्वाजा बाग
17
अगस्त 2016: हिजबुल ने श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर सैन्य काफिले पर हमला। 8 जवान शहीद हुए।
पुलवामा हमला
9 सितंबर 2016: सीआरपीएफ कैंप पर हमला। इसमें किसी की जान नहीं गई। चार दिनों के भीतर यह चौथा आतंकी हमला था।
पुंछ
11
सितंबर 2016: पठानकोट एयरबेस अटैक की तरह ये मुठभेड़ 3 दिन चली। हमले में 6 सुरक्षाकर्मी मारे गए। लश्कर-ए-तैयबा के 4 आतंकी भी मारे गए।
14 मई, 2002 : कालूचक
सैनिकों के 36 परिजन मारे गए कालूचक छावनी पर हमला, 36 की मौत। ज्यादातर सैनिकों के परिजन थे।
जनवरी, 2013 : पुंछ सेक्टर
दो सैनिकों के सिर काट ले गएः पाक रेंजर-आतंकी भारतीय सीमा में आए। पुंछ सेक्टर में 13 राजपूताना राइफल्स के लांस नायक हेमराज और सुधाकर सिंह की हत्या कर उनके सिर काटकर ले गए।
26 सितंबर, 2013 : जम्मू-कठुआ
4 हमले, कर्नल सहित 8 की मौतःजम्मू कश्मीर में दो आत्मघाती हमलों में 3 आतंकी सहित 13 मौतें। कठुआ जिले में हमले में 4 पुलिसकर्मी-2 नागरिक और सांबा जिले में हुए हमले में ले.कर्नल बिक्रमजीत सिंह सहित 4 सैनिक शहीद।
5 दिसंबर, 2014 : मोहरा-उड़ी

31 फील्ड रेजीमेंट हमला, 12 शहीदः बारामुला के उड़ी सेक्टर में मोहरा में सेना के 31 फील्ड रेजिमेंट पर हमला। एक लेफ्टिनेंट कर्नल-7 जवान शहीद, जम्मू पुलिस का एक एएसआई, 2 कांस्टेबल भी शहीद। इसमें 6 आतंकी भी मरे।
27 जुलाई 2015 : गुरदासपुर, पंजाब

आर्मी ड्रेस में किया हमला, 7 की मौतः पंजाब के गुरदासपुर में आर्मी की ड्रेस पहने 3 आतंकियों ने दीना नगर पुलिस स्टेशन पर हमला किया। हमले में एसपी सहित 4 पुलिसकर्मी एवं 3 सिविलियन मारे गए।

अगर पाकिस्तान को सबक न सिखाया गया तो यह सिलसिला आनेवाले दिनों में भी जारी रहेगा। हमें पता है कि पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी कैंप चल रहे हैं, क्या हम उन्हें खत्म करने की भी कूवत नहीं रखते। हम मानते हैं कि किसी भी तरह का एंडवेंचरिज्म या कहें दुस्साहस उलटे परिणाम भी ला सकता है लेकिन क्या जो अभी हमारे साथ हो रहा है वह बहुत अच्छा है? इजराइल जैसा छोटा देश आतंकवाद को कुचल सकता है तो भारत के हाथ कौन-सी मजबूरी बांध रही है? क्या इस बात का डर की पाकिस्तान के सिर पर चीन का हाथ है? अगर ऐसा है तो हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्वभर की अपनी यात्राओं और विश्वनेताओं से अपने संपर्क का फायदा उठायें। उनको पाकिस्तान की शैतानी हरकतों से परिचित करायें और उनको साथ लें कि वे उनके साथ आंतकवाद के खिलाफ लड़ाई में समर्थक बनें। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की हरकतों को और पुख्ता ढंग से पेश करें और आतंकवाद के खिलाफ पूरे विश्व में सशक्त जनमत तैयार करे। चीन को पाकिस्तान के साथ रहने दे भारत अमरीका, रूस और दूसरे देशों को अपने पक्ष में कर सकता है। कम से कम इतना तो कीजिए कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने उसे आतंकवादी देश के रूप में पेश कर के दक्षिण एशिया में अलग-थलग कर दीजिए, वह खुद ही परेशान हो जायेगा। हम मानते हैं कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं होते कुछ नयी समस्याएं ले कर आते हैं लेकिन आप तब क्या करेंगे जब आप हम हमले पर हमले होते रहें तब भी क्या आप सिर्फ कायरों की तरह मार खाते रहेंगे या पलट कर जवाब देंगे। गया गांधी का वह युग की कोई एक गाल में थप्पड़ मारे दो दूसरा बढ़ा दो। यह शठे शाठ्यम् समाचरेत का युग है। शठ से शठता से ही निपटा जा सकता है। जो हाथ आप पर उठे उसे तत्क्षण तोड़ दें ताकि वह किसी दूसरे निरपराध, निरीह व्यक्ति पर न उठ सके। उरी में जिस तरह सोते सैनिकों पर चोरी छिपे हमला किया गया वह शर्मनाक और निंदनीय है। शत्रु से आमने-सामने सीना तान कर लड़ाई के अभ्यस्त हमारे बीर-बांकुरे इन दुष्टों की चाल समझ नहीं पाये और हमने इतने जवान गंवा दिये। उनके परिजन बिलख रहे हैं, उन्हें बदला चाहिए। बदला कौन लेगा, सेना के हाथ खुले होते तो वह खुद ले लेती। अब जिन पर यह दारोमदार है उन्हें मुंह तोड़ जवाब दिया जायेगा।‘, ‘बरदाश्त नहीं करेंगे जैसे रटे-रटाये जुमलों से हट कर कुछ ठोस कार्रवाई करनी होगी, जो जमीनी स्तर पर दिखे और जिनके खिलाफ की गयी है उनकी भी कमर तोड़ने में सक्षम हो। अक्सर सरकारी अधिकारियों या शासक दल के नेताओं से सुनते हैं किसी को देश में आतंक फैलाने या माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जायेगी। यहां सवाल यह उठता है कि कौन-सा आतंकवादी गुट है जो आपसे इजाजत लेकर वारदात करता है। आपका तो खुफिया तंत्र भी इतना लुंज-पुंज है कि उसे भी पता हमला हो जाने के बाद ही चलता है। अब आतंकवादियों के दल के दल आते हैं वे अच्छे खासे कद-काठी के हैं चींटी तो नहीं कि कोई देख न पाये। वे हफ्तों आपके यहां आकर रेकी करते हैं फिर वारदात को अंजाम देते हैं, तब कहां सोया रहता है आपका खुफिया तंत्र। उनको निश्चित ही स्थानीय लोगों का समर्थन प्राप्त होता है वरना कई अजनबी किसी इलाके में घूमते रहें और लोग पुलिस को खबर तक नहीं करेंगे। वह भी जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में । क्या आपके पास ऐसा तंत्र नहीं कि आतंकवादियों की मदद करने वालों को पकड़ कर जेल में ठूंस सकें। क्या आतंकवाद के साथ खड़े होना या उनका समर्थन करना देशद्रोह की घटनाएं नहीं।
जहां तक पाकिस्तान से वार्ता का प्रश्न है तो उसका दूर-दूर तक कोई फायदा नजर नहीं आता। ना पाकिस्तान कश्मीर का राग छोड़ेगा और ना ही ऐसे माहौल में किसी वार्ता को सार्थक परिणाम तक ही पहुंचना है। उरी के हमले के बाद विरोधी दल के नेता तक यह कह रहे हैं कि सरकार आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे तो उनका उसे समर्थन है। इसके साथ ही फिर सभी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी 56 इंच की छाती की उक्ति को लेकर तंज कसने लगे हैं। उनका कहना है कि कहां है 56 इंच की छाती क्या वह हमारे शहीदों के बलिदान का बदला ले पायेगी। मोदी जी कुछ तो कीजिए, कुछ कीजिए कि देश आपसे बहुत उम्मीद लगाये हैं। हम जानते हैं कि आप भी इससे भीतर तक मर्माहत होंगे लेकिन संभलिए और जो भी कुछ किया जा सकता है उसे कीजिए। कारण, अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज ना जाये और देश के बेटे ऐसे ही शहीद होते रहे तो कहीं देश की जनता ही ना धैर्य खो बैठे। वह वक्त ना सिर्फ देश के वर्तमान शासकों बल्कि सबके लिए बहुत ही मुश्किल का दौर होगा।
मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान से राजनीतिक संबंध हर हाल में बनाये रखना भारत की मजबूरी है। भारत उसके रहमो-करम पर तो टिका नहीं हां अगर पाकिस्तान सचमुच समझदार होता तो भारत से बना कर चलता। तब शायद उसके लिए बहुत-सी चीजें आसान होतीं लेकिन वह तो आतंक की फैक्ट्री चला रहा है। वहां कहने को गणतंत्र है लेकिन सत्ता पर पूरी पकड़ सेना की है। वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई वर्षों से आतंकवादियों को खुलेआम समर्थन दे रही है और उन्हें भारत की सीमा से अंदर प्रवेश कराने में मदद कर रही है। यह सारी दुनिया जानती है पर पाकिस्तान हमेशा इससे इनकार करना रहा है। भारत में मुंबई हमले के आका पाकिस्तान में शाही अंदाज से रहते हैं, शानदार रैलियां करते हैं, खुलेआम भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं। इतना ही नहीं कश्मीर में अशांति बनाये रखने के लिए, वहां आतंकवादी गतिविधियां कराने के लिए खुलेआम पाकिस्तान में चंदा वसूलते हैं। हम उस देश से दोस्ती की उम्मीद कर रहे हैं यह परले दर्जे की नामसमझी है। हम जाने कितने वीर जवान आतंकवादी की लड़ाई में कुरबान कर दिये, अब और कुरबानी नहीं। अब डट कर लड़ने का वक्त आ गया है। सशक्त राष्ट्र हिमालय की तरह अडिग और अमनीय दिखना चाहिए लुंज-पुंज नहीं । अभी तो यह लगता है जैसे हम आतंकवाद के सामने आत्मसमर्पण कर बैठे हैं। दंभ और हुंकार तो नेता हर ऐसी घटना के बाद भरते हैं लेकिन कभी लगा नहीं कि वे इस विपदा के खिलाफ लड़ने को गंभीर हैं। जबानी जमा खर्च बहुत हुआ अब चेतिए वरना स्थिति हाथ से निकल जायेगी। देश इस वक्त आक्रोश में है और हर वह नेता, अधिकारी जो देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी से जुड़ा है आज कठघरे में है। अब कथनी-करनी का फर्क मिटना चाहिए। जबसे मोदी ने बलूचिस्तान के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय किया है, पाकिस्तान बौखला गया है। सीधी लड़ाइयों में हमसे मुंह की खा चुका पाकिस्तान अब आंतकवाद के रूप में छाया युद्ध लड़ रहा है और सैनिकों पर घात लगा कर हमला कर के उनका मनोबल तोड़ना चाहता है। अभी वक्त का तकाजा यही है कि पाकिस्तान से सारे कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिये जायें, वहां से अपने राजनयिक वापस बुला लिये जायें और उसका मोस्ट फेवर्ड नेशन का तत्काल खत्म किया जाये। उरी की घटना के बाद से भारत बेहद दबाव में है। यह दबाव जनता का है जो रोज-रोज अपने बेटों की मौत देख कर बौखला गयी है यह दबाव विपक्ष का है जिसके शासनकाल में ऐसी घटनाओं पर भाजपा उसे धिक्कारती रही है। मोदी जी को इन सबसे पार पाना है तो कुछ न कुछ तो करना ही होगा।
एक विनती वर्तमान शासकों से यह भी है कि देश की सुरक्षा के लिए, आतंकवाद से निपटने के लिए जो भी योजनाएं बनायी जाये मेहरबानी करके उसके सार्वजनिक ना करें। कम से कम देश की सुरक्षा की चीजों को तो गुप्त रखिए। आज के इलेक्ट्रानिक युग में हो यह रहा है कि सरकारी सूत्रों से जानकारी टीवी चैनलों तक पहुंचती है और फिर वह पूरी दुनिया के कोने-कोने में पहुंच जाती है। टेलीविजन चैनल छाती फाड़-फाड़ कर चिल्लाते हैं-अब देश के दुश्मनों की खैर नहीं, सीमा पर लेजर बीम और थर्मल पहरा उन्हें पकड़ ही लेगा।उसके बाद वे उसकी बारीक से बारीक जानकारी दे देते हैं। जैसे अभी उरी हमले के बाद सभी चैनल चिल्लाने लगे –अब पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर हमला हो सकता है। हालांकि सरकार ने ऐसी कोई घोषणा आधिकारिक तौर पर नहीं की और करनी भी नहीं चाहिए।  ऐसे अभियानो की सफलता इसी में निर्भर होती है कि इसकी किसी को कानो-कान खबर न पड़े। खबर हो गयी तो क्या अगला इतना बेवकूफ है कि अपने बचने का भी प्रयास नहीं करेगा। टेलीविजन चैनलों, प्रिंट मीडिया को भी आत्म संयम बरतना चाहिए। एक ऐसी आचार संहिता बनानी चाहिए कि जो भी बात देश की सुरक्षा से जुड़ी है और जिसके जगजाहिर होने से देश को खतरा हो सकता है  वह कदापि नहीं दिखायें। किसी भी टीआरपी या प्रसार संख्या से बड़ा और अहम होता है देश । मुंबई हमलों का लाइव प्रसारण करके टेलीविजन चैनलों ने कितना अनर्थ किया था, सभी जानते हैं। वे लगातार सुरक्षाबलों की पोजीशन का प्रसारण कर रहे थे और वहां दूर पाकिस्तान में बैठे हमलावरों के आका उस प्रसारण को देख कर तदनुसार अपने आंतकवादियों को निर्देश दे रहे थे। बाद में सरकार को जब इसकी भनक मिली तो तत्काल लाइव प्रसारण बंद कराया गया। मीडिया को छूट है भ्रष्टाचार का परदाफाश करे, नेताओं की गलती पर उनकी आलोचना करे, जहां अनर्थ हो रहा हो, अनाचार हो उस पर प्रहार करे लेकिन सुरक्षा बलों की तैयारी, तैनाती और उनको दिये जा रहे अत्याधुनिक साज-समान के बारे में विस्तार से कदापि ना बतायें। उनको याद रखना चाहिए कि वे भी इस देश के नागरिक हैं और उनका भी इस देश के प्रति दायित्व बनता है टीआरपी तो घटती-बढ़ती रहेगी कहीं देश पर संकट आ गया तो सबकी मुश्किल होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगामी सार्क सम्मेलन के लिए पाकिस्तान नहीं जाना चाहिए। इससे एक कड़ा संदेश तो जायेगा ही कि भारत के सहने की सीमा अब खत्म हो चुकी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने परमाणु बम की धमकी दी है इससे ही उनका इरादा साफ है कि वे भारत डरा कर दबाव में रखना चाहते हैं। भारत भी परमाणु संपन्न देश है। हम नहीं चाहते कि बुद्ध का यह देश युद्ध की राह पर चले लेकिन अगर आप पर ऐसा कुछ थोप दिया जाता है तो आप क्या करेंगे, पीठ दिखा कर भागने की कोशिश या मुंहतोड़ जवाब देने का जज्बा दिखायेंगे जैसा आपने पिछली लड़ाइयों और कारगिल में दिखाया। मान्यवर मोदी जी अब आपका सिद्धांत-न दैन्यम्, न पलायनम् का होना चाहिए। देश आपसे यही चाहता है। आप जैसे राष्ट्रवादी के लिए यह परीक्षा की घड़ी है और देश आपकी ओर उम्मीद से देख रहा है। उसे नाउम्मीद तो नहीं करेंगे ना मोदी जी!





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