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Wednesday, April 6, 2011

भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना हजारे का धर्मयुद्ध

एक गांधीवादी आमरण अनशन को मजबूर
-राजेश त्रिपाठी
दूसरे गांधी के नाम से प्रसिद्ध अन्ना हजारे 5 अप्रैल से दिल्ली के जंतर-मंतर में आमरण अनशन के लिए बैठ गये हैं। देश की राजनीति में एड़ी से चोटी तक व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ यह उनका धर्मयुद्ध है जिसमें उनको प्रबल जनसमर्थन मिल रहा है। उनके साथ एकजुटता दिखाने के लिए देश के सैकड़ों शहरों में लोगों ने उपवास रखा। इस तरह से भ्रष्टाचार मिटाने की उनकी मुहिम में पूरा देश शामिल हो गया। किरण बेदी, स्वामी अग्निवेश, आनंद केजरीवाल, श्री श्री रविशंकर, प्रशांत भूषण, संतोष हेगड़े, बाबा रामदेव सहित अन्य विशिष्ट व्यक्ति भी उनकी भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम में शामिल हो गये हैं। कुछ लोग तो जंतर-मंतर में ही जुटे हैं जो वहां नहीं हैं वे देश के कोने-कोने से अपना नैतिक समर्थन दे रहे हैं।
यह कैसा देश है जहां एक वयोवृद्ध सच्चे गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता को अपनी उचित बात मनवाने के लिए आमरण अनशन करना पड़ता? क्या हो रहा है यहां? जनता के लिए जनता के द्वारा चुनी गयी सरकार क्या ऐसी ही होती है? अन्ना ने क्या चाहा है यही न कि कोई ऐसी व्यवस्था हो जिससे दिनों दिन बढ़ते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे? इसमें बुरा क्या है? क्या सरकार ऐसा नहीं चाहती? हाल  के दिनों में जिस तरह जनता के पैसे की लूट हुई है वह किसी भी सत्ता या देश के लिए शर्म से डूब मरने की बात है। जहां मंत्री तक लूट में शामिल हों उस देश का भगवान ही मालिक है। अन्ना की मांग है कि सत्ता के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों तक को लोकपाल विधेयक की परिधि में लाया जाये।इसमें जनता की भी भागीदारी हो। जनता के प्रबुद्ध वर्ग के सदस्य भी इसमें शामिल हों और इसे जन लोकपाल विधेयक नाम दिया जाये। वैसे अन्ना के आमरण अनशन के दूसरे दिन इतना तो हुआ कि कृषि मंत्री शरद पवार ने एलान किया कि वे मंत्रिसमूह (जीओएम) से हटने को तैयार हैं। शरद पवार के जीओएम से हटने के प्रस्ताव पर आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सिर्फ पवार मुद्दा नहीं है। जीओएम में दूसरे भी मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि मसौदा तैयार करने के लिए हमें जन भागीदारी वाली संयुक्त कमिटी चाहिए। सरकार के आमरण अनशन खत्म करने के आग्रह को अन्ना ने ठुकरा दिया है और कहा है कि चाहे कुछ भी हो जाये उन्हें अपने प्रण से कोई भी डिगा नहीं सकता। वैसे उनके अनशन से सरकार हरकत में आयी है। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून के लिए दूसरे दिन भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखी। उन्होंने अनशन तोड़ने से इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस लोगों को गुमराह कर रही है। इस बीच उन्हें मिल रहे भारी जनसमर्थन से घबराई सरकार हरकत में आ गई है। कई केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि यूपीए सरकार जल्द ही लोकपाल बिल को पारित कराने की कोशिश करेगी।  
      अनशन के पहले अन्ना ने प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी यह मांग रखी थी लेकिन वहां से संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्हें आमरण अनशन को मजबूर होना पड़ा। दरअसल सरकार एक लंबे अरसे से लोकपाल विधेयक का ड्राफ्ट बनाने में जुटी है और अब तक इसे कार्यरूप नहीं किया जा सका।इसका ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जो मंत्रिसमूह (जीओएम) बनाया गया है उसमें वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी, गृह मंत्री पी चिदंबरम,कृषि मंत्री शरद पवार, रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी, रेल मंत्री ममता बनर्जी, कानून मंत्री वीरप्पा मोइली, संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल, रसायन एवं खाद मंत्री एम. के. अलागिरी और टेलिकॉम मंत्री कपिल सिब्बल भी हैं।
इस बीच अन्ना को मिल रहे भारी जनसमर्थन से घबराई सरकार हरकत में आ गई है। कई केंद्रीय मंत्रियों ने कहा कि यूपीए सरकार जल्द ही लोकपाल बिल को पारित कराने की कोशिश करेगी। कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने भी कहा है कि वे लोकपाल विधेयक पर सिर्फ चर्चा के लिए हैं साथ ही उनकी कोशिश होगी कि यह जल्द से जल्द पेश किया जा सके। प्रधानमंत्री ने अन्ना से आग्रह किया था कि वे अनशन का अपना इरादा बदल दें लेकिन वे अपने इरादे में अटल रहे।
      अन्ना को लोकपाल विधेयक के वर्तमान प्रारूप पर भरोसा इसलिए नहहीं है क्योंकि इसमें जनता की भागीदारी नहीं है। यह मंत्रिसमूह की ओर से ड्राफ्ट किया जा रहा है जिनके इरादे पर उन्हें भरोसा नहीं है। वैसे भी हाल के कुछ ऐसे उदाहरण देश के सामने हैं जहां सरकार ने भ्रष्टार के जांच के लिए बनी समिति का अध्यक्ष बनाया वह खुद दागदार निकले।ऐसे श्री हजारे का कहना है कि उनकी सरकार से सिर्फ यही मांग है कि  वह एक कमिटी बनाए जिसमें आधे लोग सरकार के और आधे लोग जनता के हों और यह लोग जन लोकपाल विधेयक का ड्राफ्ट बनाने का काम शुरू करें। उनका कहना है कि सरकार अकेले ही बिल का मसौदा तैयार करती है तो यह निरंकुश है, यह गणतंत्र नहीं है। अन्ना ने कह दिया है कि या कि जब तक उनकी मांग मानी जाती वे महाराष्ट्र वापस नहीं जायेंगे और अपना आमरण अनशन भी जारी रखेंगे। देश को अन्ना का शुक्रगुजार होना चाहिए की अनीति, अनाचार, दुराचार, भ्रष्टाचार और न जाने कैसे-कैसे घटाटोप अंधेरों में डूबे देश में कोई तो मशाल लेकर आगे आया।
अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित करने वाले अन्ना ने कहा है कि वे वर्तमान व्यवस्था को देखकर काफी दुखी हैं। करोड़ों का धन भ्रष्ट व्यवस्था के कारण देश के बाहर चला जा रहा है, और सरकार कुछ नहीं कर पा रही।
 भ्रष्‍टाचार का देश को घुन की तरह खाये जा रहा है। राजधानी से गांव तक और संसद से पंचायत तक सभी क्षेत्रों में भ्रष्‍टाचार ने अपनी जड़ें मजबूत कर ली है। आम आदमी परेशान है। हमारे समक्ष नैतिक बल से संपन्‍न ऐसे आदर्श की कमी है जो भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध जन-जागरण कर सकें। ऐसे में अन्ना का यह प्रयास स्तुत्य और प्रशंसनीय है। आखिर कोई तो देश की दशा-दिशा सुधारने आगे आया।
लोकपाल विधेयक 2010 अभी संसद के पास विचाराधीन है। इस बिल में प्रधानमंत्री और दूसरे मंत्रियों के खिलाफ शिकायत करने का प्रावधान है। अन्ना का कहना है कि विधेयक का  वर्तमान ड्राफ्ट प्रभावहीन है और उन्होंने एक वैकल्पिक ड्राफ्ट सुझाया है।
      अन्ना चाहते हैं कि उस वैकल्पिक ड्राफ्ट पर सरकार विचार करे और देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए लाये रहे इस विधेयक में जन भागीदारी भी हो। यह कोई अनुचित मांग नहीं। आखिर सरकार को इसमें क्या एतराज हो सकता है। देश के कुछ प्रबुद्ध लोग, कानूनविद इस विधेयक का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद करें इस पर आपत्ति क्यों? विधेयक को पास तो देश की संसद ही करेगी। देश हित में जो विधेयक आ रहा है उसके बारे में देश की राय लेने में हर्ज क्या है। सिर्फ इसे मनवाने के लिए अन्ना को आमरण अनसन क्यों करना पड़ रहा है। क्या है सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों के पास इसका जवाब। जिस तरह से अन्ना को देश के हर वर्ग के लोगों का समर्थन मिल रहा है उससे लगता यही है कि उनका यह आंदोलन अगर  देशव्यापी और व्यापक आंदोलन बन जाये तो इसमें कोई ताज्जुब नहीं।
      डाक्टर किशनबाबूराव हजारे आज अन्ना हजारे के नाम से मशहूर हैं। इसके पूर्व भी वे कई आंदोलन कर चुके हैं और सामाजिक कार्यों में सदा अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं। आज वे फिर एक नेक कार्य से आगे आये हैं और पूरा देश उनके साथ है। फेसबुक, ट्वीटर और आर्कुट जैसी कम्युनिटी साइट्स में देश भर से लोग उनके समर्थन की आवाज उठा रहे हैं। अन्ना हजारे निस्वार्थ समाजसेवी हैं, उन्हें न सत्ता का लालच है और न ही किसी तरह का दूसरा प्रलोभन यही वजह है कि लोगों को उन पर यकीन है और पूरा देश उनके साथ है। उनका कहना है कि उनकी यह लड़ाई किसी मंत्री के खिलाफ नहीं बल्कि भ्रष्टाचार से है जिससे आज पूरा देश त्रस्त है। उनका आंदोलन देश के लिए है इसलिए उसे अपार जनसमर्थन मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। शायद हर सच्चा हिंदुस्तानी यही चाहेगा कि सरकार अन्ना की सुने और उनके सुझाव को वैसा ही सम्मान दे जैसा किसी वयोवृद्ध और तपे तपाये सामाजिक कार्यकर्ता को दिया जाना चाहिए। हर हिंदुस्तानी दिल से उनके साथ है और ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह सत्ता में बैठे लोगों को सद्बुद्धि दे ताकि वे जिद छोड़ अन्ना के सुझावों पर जल्द से जल्द गौर करें। जिस दल को उनके अनशन से ज्यादा परेशानी हो रही है उसके कुछ नेताओं का कहना है कि अन्ना किसी दल के इशारे पर काम कर रहे हैं। लेकिन जो लोग अन्ना को जानते हैं कि यह सच्चा गांधीवादी समाजसेवी किसी दल के दलदल में नहीं फंसा। इसे तो सिर्फ और सिर्फ देश की चिंता है जिसके लिए आज उसे अनशन तक करना पड़ रहा है जो उस देश का दुर्भाग्य है साथ ही उस गांधी का भी जिसने अपने इस अमोघ अस्त्र (आमरण अनशन) से बड़ी-बड़ी समस्याएं सुलझायीं।
हम सब अन्ना के इस पुनीत कार्य में दिल से उनके साथ हैं। बहरी सत्ता के कान खोलने के लिए उन्हें ऐसा करने पर मजबूर होना पड़ा है। ईश्वर करें सत्ता के कान खुलें और वह जनता के प्रति जवाबदेही के बारे में गंभीर हो ताकि किसी अन्ना को आमरण अनशन को बाध्य न होना पडे।

1 comment:


  1. अन्ना एक विचारधारा है. आईये, इसे आत्मसात करें.

    ’ईमानदारी को अपनी जीवन शैली बनायें.यही अन्ना के आंदोलन को सच्चा समर्थन है.’

    -समीर लाल ’समीर’

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