Tuesday, September 2, 2014

हो सके तो किसी का सहारा बनो


   
  






राजेश त्रिपाठी
जरूरी नहीं कि तुम आसमां का सितारा बनो।
अगर हो सके तो किसी का सहारा बनो।।

कभी-कभी मझधार में डुबो देती है कश्ती भी।
हो सके तो किसी डूबते का किनारा बनो।।

जन्म आदम का मिलता है भाग्य से।
जरूरी नहीं कि मनुज दोबारा बनो।।

उपकार जितना बन सके करते चलो।
हो सके तो दुखियों की आंख का तारा बनो।।

जो मजलूम हैं महरूम हैं इस दुनिया में।
उनके हक की आवाज, उनका नारा बनो।।

रास्ते खुद मंजिलों तक ले जायेंगे तुमको।
हौसला रखो बुलंद न तुम नाकारा बनो।।

मतलबपरस्त हो गयी है अब दुनिया।
सोचो-समझो फिर किसी का सहारा बनो।।

प्यार इक व्यापार बन गया है आजकल।
इससे बच कर रहो या फिर आवारा बनो।।

अब यहां हवन करते भी हाथ जलते हैं।
जांचो-पऱखो फिर किसी का प्यारा बनो।।

तकदीर ऊपर से लिख कर नहीं आती।
अपनी तकदीर के बादशाह, खुदारा बनो।।