Wednesday, March 25, 2026

आत्मकथा-80

 उदयन शर्मा  का जाना



प्रभात खूबर डाट कम वेबसाइट का काम सुचारु रूप से चल रहा था। इस पर संपादक हरिवंश जी की पैनी नजर हमेशा बनी रहती थी। वे बीच बीच में जरूरी सुझाव भी देते रहते थे। कभी कभी वे रांची से कोलकाता भी आ जाते थे और वेवसाइट के बारे में नये परिवर्तन के सुझाव देते थे।  और जब वे कोलकाता आते तो प्रभात खबर अखबार के बारे में भी आवश्यक सुझाव देना नहीं भूलते थे।एक बार वे अचानक आये और उन्होंने बताया कि उदयन शर्मा जी गंभीर रूप से बीमार हैं मुझे अभी दमदम एयरपोर्ट  से विमान द्वारा उन्हें देखने जाना है। उदयन जी की स्थिति गंभीर है यह सुन कर मुझे भी बहुत दुख हुआ। पहली बात यह कि हमने कोलकाता के आनंद बाजार प्रकाशन के हिंदी साप्ताहिक रविवार  में उदयन जी के संपादकित्व में काम किया था दूसरी बात यह कि संयोग से उदयन जी से मेरा सीधा रिश्ता निकल आया था। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के गौरिहार में जिस परिवार में मेरा ननिहाल था उदयन शर्मा की ससुराल भी उसी परिवार में थी। इस तरह से उनसे मेरा सीधा रिश्ता निकल आया था। जब उदयन जी ने रविवार के कार्यालय में खुशी खुशी  घोषणा की कि पंडित (यानी मैं) तो मेरा रिश्तेदार निकल गया। जिस परिवार में इसका ननिहाल वही परिवार मेरा ससुराल। उस  वक्त मैंने महसूस किया कि रविवार के हमारे कुछ साथियों के चेहरे उतर गये थे। उन्होंने ऐसा सोच लिया कि अब तो उदयन जी प्रोमोशन वगैरह में राजेश त्रिपाठी को ही प्रमुखता देंगे लेकिन  ऐसा कुछ नहीं हुआ। यह और बात है कि जब वे संडे आब्जर्बर में जाने लगे तो मुझे भी उसमें ले जाना चाहते थे इसके लिए मेरे भैया रुक्म जी से भी उन्होंने बात की पर भैया राजी नहीं। वही उदयन जी गंभीर रूप से बीमार हैं यह जानकर मुझे भी बहु दुख हुआ। हम सभी लोग मन ही मन प्रार्थना 


 पंडित जी को ठीक कर दें। हरिवंश जी दमदम एयरपोर्ट निकलने वाले थे तभी दिल्ली से फोन आया कि उदयन जी नहीं रहे। यह 1 अप्रैल 2001 का मनहूस दिन था जब 51 वर्ष की आयु में हमारे प्यारे पंडित जी का निधन हो गया। इस खबर ने हम सबको दुखी कर दिया हरिवंश जी ने मुझे आदेश दिया उदयन जी पर खबर बनाइए। मैंने खबर बनायी जिसका शीर्षक था-ऐसे थे हमारे पंडित जी जो प्रभात खबर के पहले पेज से आखिरी पेज तक छपी थी। (क्रमश:) 

No comments:

Post a Comment