Saturday, January 10, 2026

हरिवंश जी के निर्देश हमारे पथ प्रदर्शक थे

 आत्मकथा -79

  1. इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी दैनिक जनसत्ता की नौकरी से मुक्त होकर मैं पूरी तरह से प्रभात खबर की  वेवसाईट के लिए  समर्पित हो गया। वहां एक तरह शून्य से शुरू करना था। हमारे पास अगर कुछ था तो वह एक ढांचा था जिसमें अलग अलग विभाग थे जो खाली थे। मेरा और मेरे साथी वाई एन झा ने पहले ही कुछ ना कुछ सामग्री डाल दी थी। यह वर्ल्ड वाइड वेव प्लेटफार्म था जिसकी पहुंच पूरे विश्व तक थी। हमारे पाठक देश में तो थी फोकस विदेश में बसे उन लाखों करोड़ों प्रवासियों पर भी था जो अपनी धरती से दूर थे और उसके सुख दुख तीज त्योहार से सीधे नहीं जुड़ पाते थे। हमारी कोशिश यह होती थी कि हम इन त्योहारों के बारे में विस्तृत सचित्र जानकारी दें। इसका परिणाम भी हमारे सामने जल्द आ गया। विदेश में रह रहे अनेक प्रवासी भारतीयों के ईमेल का तांता लग गया। उनमें सभी का आशय यही होता कि आपका बहुत बहुत आभार। आपकी वेबसाइट ने देश से दूर  रहते हुए भी हमें अपने तीज त्योहारों से जोड़ दिया। वेबसाइट की  सफलता से इससे जुड़े हम लोग भी उत्साहित और प्रसन्न थे।
  2.  यह जिस वक्त की बात है उस वक्त अमरीकी सेना अफगानिस्तान की पहाड़ियों गुफाओं में अलकायदा प्रमुख बिन लादेन को खोज रही थी। वही लादेन जिसे न्यूयार्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टावरों पर विमान से हमला करने का दोषी माना गया था। हरिवंश जी का आदेश था कि इसके बारे में वेबसाइट में विस्तार से दिया जाये साथ ही प्रभात खबर अखबार में इस बारे में विस्तृत जानकारी दी जाये। हम लोग उनके आदेश का अक्षरश: पालन कर रहे थे। इसका पाठकों पर अच्छा असर पड़ रहा था।
  3.  जिस दिन अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ था उस दिन प्रभात खबर कोलकाता के स्थानीय संपादक दूसरे दिन का अखबार प्रेस में छोड़ कर घर चले गये थे। मैंने तुरत उन्हें फोन कर बुलाया और उन्होंने पहले पेज पर अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले की विस्तृत रिपोर्ट अखबार में दी जा सकी।
  4.  इस तरह से देखा जाये तो हम लोगों की कोशिश होती थी कि जो भी प्रमुख खबर मिले उसे अखबार में भी पहुंचाया जाये अब यह अखबार के संपादक पर था कि वह अगर सही समझें तो अखबार में जगह दें। इस तरह हम यथा संभव वैबसाइट के साथ ही अखबार में भी सहयोग करते थे। इस तरह देखा जाये तो वेवसाइट और प्रिंट मीडिया के बीच अच्छा समन्वय था। एक तरह से हरिवंश जी के सजग निर्देशन ही हमारे पथ प्रदर्शक थे। वे बीच बीच में रांची से कोलकाता आते थे और अखबार और वेबसाइट के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दे जाते थे।  (क्रमश:)
  5.  
  6.  

No comments:

Post a Comment