Wednesday, October 9, 2013

दुर्गा पूजा का अभिनंदन, मां आपका कल्याण करें


आकर करो दुष्ट संहार

दुर्गति नाशिनी जय मां दुर्गे, चंड-मुंड विनाशिनी माता।
खड्ग त्रिशूल धारिणी हो तुम, सिंहवाहिनी हे जग त्राता।।
तुमने एक महिषासुर मारा, देवों को दिया अभय वरदान।
महिषासुर हैं आज अनेकों, मां उन्हें मार कीजै कल्याण।।
भारत के वासी पीड़ित हैं, ललनाओं पर है संकट छाया।
उनका शील लूट रहे हैं, महिषासुर धर मानव की काया।।
हे मां एक बार फिर आओ, हरने धरती का अब भार । 
घर-घर में कोहराम मचा है, आकर करो दुष्ट संहार ।। 
                               -राजेश त्रिपाठी